अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
काठमांडू, 09 मार्च। नेपाल की राजधानी काठमांडू इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 के करीब पहुंच गया है, जिसे “बहुत अस्वस्थ” श्रेणी में रखा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम2.5 प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं। ये कण स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माने जाते हैं और खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से बीमार लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
वातावरण विभाग के महानिदेशक ज्ञान राज सुवेदी के मुताबिक काठमांडू में खराब वायु गुणवत्ता के पीछे शहरी उत्सर्जन और प्रतिकूल मौसम दोनों जिम्मेदार हैं। शांत हवाओं और बारिश की कमी के कारण धुआं, धूल और अन्य प्रदूषक वातावरण में फैल नहीं पाते और घाटी में ही जमा हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि वाहनों से निकलने वाला धुआं, विशेष रूप से डीजल चालित वाहन जो तय मानकों से अधिक धुआं छोड़ते हैं, प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहे हैं। इसके अलावा औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य से उठने वाली धूल, बायोमास जलाना और घरेलू ईंधन का उपयोग भी वायु प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं।
वातावरण विभाग के अनुसार काठमांडू के आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण और मौसमी जंगल की आग भी स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण ऊर्जा खपत, परिवहन की मांग और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे पीएम2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों की मात्रा में वृद्धि हो रही है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के अंत में काठमांडू में पीएम2.5 का औसत स्तर 45.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जो लगभग एक्यूआई 128 के बराबर है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय वार्षिक सुरक्षित सीमा 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से लगभग नौ गुना अधिक है।
वर्तमान में काठमांडू दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित प्रमुख शहरों में तीसरे स्थान पर है और पिछले 30 दिनों से यहां की वायु गुणवत्ता लगातार “अस्वस्थ” श्रेणी में बनी हुई है। विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष रूप से प्रदूषण के चरम समय में बाहर कम निकलने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम में बदलाव और उत्सर्जन नियंत्रण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद ही आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।