अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
काठमांडू, 23 मार्च। नेपाल में जेन जी आंदोलन की जांच रिपोर्ट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 27 मार्च को नई सरकार के गठन के बाद इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने या लागू करने की जिम्मेदारी अब आने वाली सरकार पर होगी।
अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार ने फिलहाल रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि वह अपनी जिम्मेदारी पूरी कर चुकी है और अब आगे की कार्रवाई नई सरकार तय करेगी।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मंत्रिपरिषद ने हाल ही में जांच आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन इसे सार्वजनिक करने या लागू करने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। रिपोर्ट अभी प्रधानमंत्री कार्यालय में ही रखी हुई है।
नेपाल के मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट को सार्वजनिक करना या नहीं करना कैबिनेट का अधिकार है। वहीं, 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे बालेन्द्र शाह के सामने यह एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक फैसला होगा।
इधर, जेन जी आंदोलन से जुड़े नेताओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आंदोलन की अगुवा रक्षा बम ने सरकार से रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा है कि 8 और 9 सितंबर 2025 की घटनाओं की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, इसलिए नई सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।