लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
ब्रिटेन में बाल यौन शोषण और तथाकथित ग्रूमिंग गैंग्स को लेकर जारी 219 पृष्ठों की "रेप गैंग इंक्वायरी रिपोर्ट" ने देशभर में व्यापक बहस छेड़ दी है। यह एक स्वतंत्र, पीड़ित-केंद्रित जांच है, जिसकी अध्यक्षता सांसद रूपर्ट लोव ने की है। जांच में प्रमुख भूमिका सर्वाइवर और अभियानकर्ता सैमी वुडहाउस ने निभाई, जबकि पैनल में सांसद एस्थर मैकवे, निक टिमोथी और कार्ला लॉकहार्ट शामिल रहे।
रिपोर्ट पीड़ितों की गवाहियों, व्हिसलब्लोअर्स के बयानों, मीडिया रिपोर्टों और पूर्व सार्वजनिक जांचों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें दावा किया गया है कि ब्रिटेन में दशकों तक संगठित बाल यौन शोषण का एक व्यापक नेटवर्क सक्रिय रहा। रिपोर्ट के अनुसार, मामलों में शामिल आरोपितों में लगभग 95 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम पुरुष थे और उनके मुख्य निशाने श्वेत ब्रिटिश कामकाजी वर्ग की नाबालिग लड़कियां थीं।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि संगठित गिरोह पीड़ितों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाते थे, उन्हें नशीले पदार्थ और शराब उपलब्ध कराते थे, कथित तौर पर शोषण के वीडियो रिकॉर्ड करते थे तथा ब्लैकमेल और दबाव के लिए उनका इस्तेमाल करते थे। रिपोर्ट का दावा है कि ऐसे अपराध कई दशकों से, विशेष रूप से 1950 के दशक से, ब्रिटेन के विभिन्न क्षेत्रों में होते रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कम से कम 2.5 लाख युवा ब्रिटिश लड़कियां इस संगठित शोषण का शिकार हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों को लंबे समय तक यौन हिंसा, मानव तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों का सामना करना पड़ा। हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए कई दावों को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर बहस जारी है तथा विभिन्न पक्ष इन निष्कर्षों की स्वतंत्र जांच और समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
रिपोर्ट ने पुलिस, स्थानीय प्रशासन और अन्य संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हुई।