लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई को सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए और इस दौरान अमेरिका तथा इसराइल के खिलाफ नारे भी सुनाई दिए।
ईरानी नेतृत्व ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि देश अपने नेताओं और नीतियों के समर्थन में एकजुट है। खामेनेई की मौत और अंतिम संस्कार का कार्यक्रम ऐसे समय हुआ जब ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ था।
अंतिम विदाई समारोह में ईरान समर्थक समूहों और क्षेत्रीय सहयोगियों की मौजूदगी भी चर्चा में रही। इसे ईरान की ओर से अपने प्रभाव और "प्रतिरोध" की राजनीति को दिखाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिका और इसराइल के खिलाफ नारों के जरिए ईरान ने अपने समर्थकों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि बाहरी दबाव के बावजूद उसकी राजनीतिक और वैचारिक स्थिति कायम है। वहीं, अमेरिका की ओर से भी खामेनेई के अंतिम संस्कार और ईरान के रुख पर बयान सामने आए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बड़े राजकीय आयोजनों का इस्तेमाल अक्सर घरेलू समर्थन मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देने के लिए किया जाता है। खामेनेई की अंतिम विदाई भी इसी संदर्भ में देखी जा रही है, जहां भावनात्मक माहौल के साथ-साथ कूटनीतिक संकेत भी दिखाई दिए।
मध्य पूर्व में पहले से मौजूद तनाव के बीच यह आयोजन ईरान की भविष्य की रणनीति और अमेरिका-इसराइल के साथ उसके रिश्तों पर असर डाल सकता है। आने वाले समय में दोनों पक्षों के कदमों पर दुनिया की नजर रहेगी