लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
तमिलनाडु की कांचीपुरम विधानसभा सीट इस बार राज्य की सबसे चर्चित सीटों में शुमार हो गई है। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से अहम यह क्षेत्र अब बदलते सियासी समीकरणों के कारण दिलचस्प मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। पारंपरिक दलों के साथ नई राजनीतिक ताकतों की एंट्री ने चुनाव को और अधिक रोमांचक बना दिया है।
वेगवती नदी के किनारे स्थित कांचीपुरम कभी पल्लव और चोल राजवंशों की राजधानी रहा है। कामाक्षी अम्मन, एकाम्बरेश्वर और वरदराज पेरुमल जैसे प्रसिद्ध मंदिरों के कारण इसे ‘मंदिरों का शहर’ भी कहा जाता है। साथ ही, यहां की रेशमी साड़ियां वैश्विक पहचान रखती हैं और इन्हें भौगोलिक संकेतक (GI) का दर्जा भी मिल चुका है।
चुनावी इतिहास की बात करें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में द्रमुक के उम्मीदवार एझिलरासन ने 1,02,712 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी पट्टाली मक्कल काची के महेश कुमार रहे। वहीं, नाम तमिझर काची और मक्कल नीधी मय्यम क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। 1977 के बाद से यह सीट अन्नाद्रमुक के लिए अपेक्षाकृत मजबूत रही है, हालांकि हाल के वर्षों में द्रमुक ने अपनी पकड़ मजबूत की है।
स्थानीय मुद्दों में पेयजल संकट, जल निकासी और सीवरेज की समस्याएं, अधूरी शहरी सुविधाएं और बुनकरों को पर्याप्त सरकारी समर्थन का अभाव प्रमुख हैं। ये मुद्दे इस बार के चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
राजनीतिक रणनीतियों पर नजर डालें तो सत्तारूढ़ द्रमुक अपनी कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के आधार पर समर्थन बनाए रखने की कोशिश में है। वहीं अन्नाद्रमुक सरकार विरोधी माहौल को भुनाने के लिए कानून-व्यवस्था, महंगाई और अधूरे वादों को मुद्दा बना रही है।
भाजपा अभी इस सीट पर मजबूत स्थिति में नहीं है, लेकिन शहरी युवाओं और मध्यम वर्ग में अपनी पकड़ बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
सबसे बड़ा बदलाव अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (टीवीके) की एंट्री से आया है। यह नई पार्टी खासतौर पर युवाओं और पहली बार वोट देने वालों को आकर्षित कर सकती है, जिससे वोटों का समीकरण बदल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चार-कोणीय मुकाबले के चलते इस बार कांचीपुरम विधानसभा सीट पर कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। पारंपरिक वोट बैंक, स्थानीय मुद्दों और नई राजनीतिक ताकतों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि जीत किसके खाते में जाती है।