लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
मथुरा: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने नदियों में सिक्के फेंककर मनोकामना पूरी होने की प्रचलित मान्यता पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में सिक्के डालने से कोई इच्छा पूरी नहीं होती और न ही शास्त्रों में ऐसा करने का कोई निर्देश दिया गया है।
एक प्रवचन के दौरान प्रेमानंद महाराज ने बताया कि यदि श्रद्धालु पुण्य कमाना चाहते हैं तो उन्हें धन को नदी में फेंकने के बजाय किसी जरूरतमंद व्यक्ति, बीमार की सहायता, गौसेवा या जीवों के भोजन पर खर्च करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि थोड़े-थोड़े पैसे बचाकर किसी गरीब को भोजन कराया जा सकता है या गायों के लिए चारा खरीदा जा सकता है।
महाराज ने यह भी कहा कि नदी में सिक्के डालने से जल में रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंच सकता है। उनके अनुसार धर्म का वास्तविक उद्देश्य सेवा, करुणा और परोपकार है, न कि बिना शास्त्रीय आधार वाली परंपराओं का पालन करना।
प्रेमानंद महाराज के इस संदेश को सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है। बड़ी संख्या में लोग उनके विचारों को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि श्रद्धा का सबसे अच्छा स्वरूप दूसरों की मदद और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना है।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि समय के साथ कई लोक मान्यताएं प्रचलित हो गईं, लेकिन किसी भी धार्मिक आचरण का आधार शास्त्र और समाजहित होना चाहिए। प्रेमानंद महाराज का यह संदेश भी लोगों को आस्था के साथ-साथ सेवा और सदाचार की ओर प्रेरित करता है।