गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी मामले में जांच एजेंसियों को बड़ा खुलासा हाथ लगा है। पुलिस और एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि यह सिर्फ स्थानीय विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात समेत 10 राज्यों में हिंसा फैलाने की सुनियोजित साजिश रची गई थी।
जांच के अनुसार गिरफ्तार 66 लोगों में से 45 लोग वास्तविक मजदूर नहीं थे। ये बाहरी तत्व बताए जा रहे हैं, जिनका मकसद श्रमिक आंदोलन की आड़ में औद्योगिक शांति भंग करना, आगजनी और पथराव कर माहौल बिगाड़ना था। पुलिस ने कई आरोपियों को हिंसा भड़काने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा ‘दुपट्टे’ को लेकर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लड़कियों को खास ट्रेनिंग दी गई थी, जिसमें उन्हें अपने दुपट्टे का इस्तेमाल कर पुलिस की कार्रवाई से बचने, भीड़ को उकसाने और अफरा-तफरी की स्थिति बनाने के तरीके सिखाए गए। इस खुलासे ने जांच एजेंसियों को और सतर्क कर दिया है।
पुलिस का दावा है कि इस पूरी साजिश के पीछे संगठित नेटवर्क सक्रिय था। यूपी एसटीएफ ने इस मामले के कथित मास्टरमाइंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद उर्फ रस्टी को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। उस पर मजदूर आंदोलन को हिंसक रूप देने, सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने और आगजनी की साजिश रचने का आरोप है।
कुछ रिपोर्ट्स में पाकिस्तान कनेक्शन की भी जांच की बात सामने आई है। दावा किया गया कि सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट पाकिस्तान से सक्रिय थे, जो प्रदर्शन को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि पुलिस अभी इस एंगल की विस्तृत जांच कर रही है।
प्रशासन का कहना है कि पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए लगातार पूछताछ और डिजिटल जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।