लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 84 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर और उनकी पत्नी को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने करीब 2.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी और जज बताकर वीडियो कॉल पर फर्जी अदालत लगाई और दंपति को 12 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को सबसे पहले व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल करोड़ों रुपये के कथित बैंक घोटाले में हुआ है। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें किसी से बात न करने और लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया।
अगले दिन वीडियो कॉल पर कथित ईडी अधिकारी और फिर एक फर्जी जज के सामने पेश किया गया। जांच और संपत्ति सत्यापन के नाम पर ठगों ने दंपति से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई। इतना ही नहीं, ठगों के कहने पर पीड़ित ने लगभग 70 लाख रुपये उधार लेकर भी उनके खातों में भेज दिए। 22 मई से 4 जून के बीच कुल ₹2,19,73,003 रुपये पांच अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।
जब दंपति को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने गाजियाबाद साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और मनी ट्रेल की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि भारत में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी पुलिस, ईडी, सीबीआई या अदालत वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही जांच के नाम पर किसी सरकारी खाते में पैसे जमा कराने को कहती है। ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।